अंडमान सागर में गैस की नई खोज से बढ़ीं उम्मीदें, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिल सकता है बड़ा सहारा
नई दिल्ली। अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की नई खोज ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं।
सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान द्वीप समूह के पास समुद्री क्षेत्र में किए गए एक खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि की है।
इस उपलब्धि को देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह खोज अंडमान द्वीपों के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित “श्री विजयपुरम-3” नामक कुएं में हुई है।
शुरुआती परीक्षणों के दौरान लगातार गैस निकलने के संकेत मिले, जिससे वैज्ञानिकों और ऊर्जा विशेषज्ञों का उत्साह बढ़ गया है।
सरकार का मानना है कि यह खोज भविष्य में बड़े ऊर्जा भंडारों तक पहुंचने का मार्ग खोल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंडमान बेसिन को लंबे समय से संभावित हाइड्रोकार्बन क्षेत्र माना जाता रहा है।
हालिया खोज ने इस धारणा को और मजबूत किया है। मौजूदा अभियान के दौरान ऑयल इंडिया द्वारा ड्रिल किए गए तीन खोजी कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन के संकेत मिल चुके हैं, जो क्षेत्र की संभावनाओं को दर्शाता है।
हालांकि, इस खोज से तुरंत व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं होगा। किसी भी गैस भंडार को उत्पादन में लाने से पहले विस्तृत परीक्षण, भंडार का आकलन, तकनीकी अध्ययन और आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री परियोजनाओं को उत्पादन चरण तक पहुंचने में कई वर्ष लग सकते हैं।
भारत वर्तमान में अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी देश काफी हद तक विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है।
ऐसे में यदि अंडमान क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में व्यावसायिक रूप से उपयोगी गैस भंडार की पुष्टि होती है, तो इससे आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
सरकार की गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस खोजने की महत्वाकांक्षी पहल को भी इस खोज से बल मिला है।
आने वाले वर्षों में आगे की ड्रिलिंग और अनुसंधान यह तय करेंगे कि अंडमान सागर भारत के लिए कितना बड़ा ऊर्जा केंद्र बन सकता है।
फिलहाल यह खोज देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
