टाइटल: केतन पारेख स्कैम से लेकर कोविड तक: मार्केट के इतिहास के 25 साल, मार्केट में गिरावट के दौरान एसेट एलोकेशन की सबसे अच्छी रणनीति बताते हैं।

बाजार गिरावट में एसेट एलोकेशन

नई दिल्ली: शेयर बाजार में गिरावट निवेशकों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है।

पिछले 25 वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो केतन पारेख घोटाला, डॉटकॉम क्रैश, 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी, कोविड-19 महामारी और हालिया अमेरिका-ईरान तनाव जैसे बड़े घटनाक्रमों ने भारतीय शेयर बाजार को गहरे झटके दिए। हालांकि, ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं

कि जिन निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ डेट (Debt) का संतुलित आवंटन रखा, उन्हें बाजार गिरावट के दौरान अपेक्षाकृत कम नुकसान उठाना पड़ा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से नौ प्रमुख बाजार गिरावटों का विश्लेषण किया गया। इनमें केतन पारेख घोटाले और डॉटकॉम क्रैश के दौरान बाजार में लगभग 35% से 39% तक की गिरावट दर्ज हुई, जबकि 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स करीब 60% तक टूट गया। कोविड-19 के दौरान बाजार केवल 32 दिनों में 37% गिरा, लेकिन इसकी रिकवरी अपेक्षाकृत तेज रही। वहीं, हालिया अमेरिका-ईरान तनाव के कारण आई गिरावट से बाजार अब भी पूरी तरह उबर नहीं पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इक्विटी आधारित पोर्टफोलियो बाजार गिरावट का पूरा असर झेलते हैं।

उदाहरण के लिए, 2008 की मंदी में 100% इक्विटी पोर्टफोलियो 60% तक गिर गया, जबकि 65% इक्विटी और 35% डेट वाले पोर्टफोलियो में गिरावट लगभग 41% रही। इसी तरह 50:50 के संतुलित पोर्टफोलियो में नुकसान करीब 31% और 25% इक्विटी व 75% डेट वाले पोर्टफोलियो में केवल 14% की गिरावट दर्ज की गई।

कोविड-19 संकट के दौरान भी यही रुझान देखने को मिला। जहां पूर्ण इक्विटी निवेशकों को 37% तक का नुकसान हुआ, वहीं अधिक डेट वाले पोर्टफोलियो में गिरावट काफी सीमित रही। इससे स्पष्ट होता है कि संतुलित एसेट एलोकेशन बाजार की अस्थिरता के समय जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट अस्थायी होती है, लेकिन रिकवरी में कई बार महीनों या वर्षों का समय लग सकता है।

इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर निर्णय लेने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार इक्विटी और डेट का संतुलित पोर्टफोलियो बनाए रखना चाहिए। इतिहास बताता है कि सही एसेट एलोकेशन न केवल नुकसान को सीमित करता है, बल्कि लंबे समय में बेहतर निवेश अनुभव भी प्रदान करता है।

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