कोई भी फ्लेक्सी कैप फंड 1 साल में 10% रिटर्न नहीं दे पाया, क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?
पिछले एक वर्ष में फ्लेक्सी कैप म्यूचुअल फंड श्रेणी का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा है।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, एक भी फ्लेक्सी कैप फंड ऐसा नहीं रहा जिसने निवेशकों को 10 प्रतिशत से अधिक का वार्षिक रिटर्न दिया हो। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है
कि यह स्थिति फंड मैनेजमेंट की कमजोरी नहीं, बल्कि बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का परिणाम है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Quant Flexi Cap Fund ने लगभग 9.91% का रिटर्न देकर इस श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद Navi Flexi Cap Fund, ITI Flexi Cap Fund, Bank of India Flexi Cap Fund और Helios Flexi Cap Fund का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। इसके बावजूद अधिकांश फ्लेक्सी कैप योजनाएं 5 प्रतिशत से कम रिटर्न देने में सफल रहीं और कई योजनाओं ने नकारात्मक रिटर्न भी दर्ज किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमजोर प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह बड़ी कंपनियों (Large Cap) के शेयरों में कमजोरी रही। जून 2026 तक फ्लेक्सी कैप फंडों का औसत निवेश लगभग 55 प्रतिशत बड़ी कंपनियों में था, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 19-19 प्रतिशत निवेश था। पिछले एक वर्ष में लार्जकैप सूचकांकों का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इसका सीधा असर फ्लेक्सी कैप फंडों के रिटर्न पर दिखाई दिया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर किसी फंड का मूल्यांकन करना उचित नहीं है। फ्लेक्सी कैप फंडों का उद्देश्य विभिन्न मार्केट कैपिटलाइजेशन में निवेश कर लंबी अवधि में बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न देना होता है। पिछले पांच वर्षों में इस श्रेणी ने औसतन लगभग 11.5 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न देकर लंबी अवधि के निवेशकों को अच्छा लाभ पहुंचाया है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को कम से कम 5 से 7 वर्ष के निवेश क्षितिज के साथ फ्लेक्सी कैप फंडों का मूल्यांकन करना चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बाजार का सामान्य हिस्सा हैं और इनके आधार पर जल्दबाजी में निवेश से बाहर निकलना भविष्य के संभावित लाभ को प्रभावित कर सकता है।
बाजार जानकार यह भी सुझाव देते हैं कि निवेशकों को केवल एक श्रेणी पर निर्भर रहने के बजाय फ्लेक्सी कैप, लार्ज एंड मिडकैप, मल्टीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। इससे अलग-अलग बाजार चक्रों में जोखिम कम होता है और दीर्घकाल में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ती है। इसलिए मौजूदा कमजोर प्रदर्शन को चिंता का विषय मानने के बजाय इसे बाजार चक्र का हिस्सा समझकर दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर कायम रहना अधिक उचित माना जा रहा है।

