Good Company, Wrong Price: केवल अच्छी कंपनी होना काफी नहीं, सही वैल्यूएशन पर निवेश भी है जरूरी
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के साथ-साथ अनलिस्टेड शेयरों में निवेश का आकर्षण भी तेजी से बढ़ रहा है।
अब कई निवेशक किसी कंपनी के आईपीओ (IPO) का इंतजार करने के बजाय उसकी अनलिस्टेड हिस्सेदारी पहले ही खरीदना पसंद कर रहे हैं,
ताकि लिस्टिंग के समय अधिक मुनाफा कमाया जा सके। हालांकि हाल के कुछ आईपीओ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी अच्छी कंपनी में केवल जल्दी निवेश करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। निवेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कंपनी का सही वैल्यूएशन (Valuation) है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार निवेशक किसी लोकप्रिय कंपनी के नाम और भविष्य की संभावनाओं से प्रभावित होकर उसके शेयर ऊंची कीमत पर खरीद लेते हैं।
लेकिन यदि कंपनी का मूल्यांकन पहले से ही काफी महंगा है, तो लिस्टिंग के बाद अपेक्षित रिटर्न मिलने की संभावना कम हो सकती है।
हालिया उदाहरणों में कुछ चर्चित कंपनियों के अनलिस्टेड शेयर आईपीओ से पहले काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे थे, लेकिन आईपीओ मूल्य या लिस्टिंग के बाद निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी निवेश का मूल सिद्धांत यह है कि अच्छी कंपनी भी गलत कीमत पर खरीदी जाए तो वह कमजोर निवेश साबित हो सकती है।
इसके विपरीत, मजबूत वित्तीय स्थिति, बेहतर प्रबंधन और दीर्घकालिक विकास क्षमता वाली कंपनी यदि उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध हो, तो वह निवेशकों के लिए बेहतर अवसर बन सकती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेश निर्णय लेते समय केवल कंपनी की लोकप्रियता या आईपीओ से पहले उपलब्धता को आधार नहीं बनाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के लाभ, आय वृद्धि, नकदी प्रवाह, उद्योग की स्थिति, प्रतिस्पर्धा और वैल्यूएशन जैसे प्रमुख वित्तीय संकेतकों का भी सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अनलिस्टेड बाजार में तरलता (Liquidity) अपेक्षाकृत कम होती है और मूल्य निर्धारण पूरी तरह पारदर्शी नहीं होता। ऐसे में ऊंची कीमत पर खरीदारी जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और केवल तभी निवेश करना चाहिए जब कंपनी का मूल्यांकन उसके वास्तविक व्यवसाय और भविष्य की विकास क्षमता के अनुरूप हो।
बाजार का इतिहास बताता है कि सफल निवेश केवल अच्छी कंपनियां चुनने से नहीं, बल्कि उन्हें सही कीमत पर खरीदने से बनता है। इसलिए निवेशकों के लिए यह समझना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि “अच्छी कंपनी” और “सही निवेश” हमेशा एक ही बात नहीं होती।

