विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत, सरकारी बॉन्ड निवेश पर पूंजीगत लाभ कर से छूट

विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर टैक्स छूट

नई दिल्ली। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश से होने वाली पूंजीगत लाभ आय पर कर छूट देने की घोषणा की है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और विदेशी निवेशक घरेलू शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाल रहे हैं। संसद का सत्र नहीं चलने के कारण सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से इस बदलाव को लागू किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के तहत आयकर अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

नए प्रावधानों के अनुसार, पात्र विदेशी निवेशकों और BIS को निर्दिष्ट सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और उनकी बिक्री, हस्तांतरण, विनिमय अथवा परिपक्वता पर प्राप्त पूंजीगत लाभ पर कर नहीं देना होगा। हालांकि, निवेशकों को निर्धारित खुलासा और रिपोर्टिंग नियमों का पालन करना होगा।

सरकार का मानना है कि यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड को अधिक आकर्षक बनाएगा। इससे उन्हें बेहतर कर-पश्चात (पोस्ट-टैक्स) रिटर्न मिलेगा और देश में दीर्घकालिक विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है। यह कर छूट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।

वर्तमान में विदेशी निवेशकों को सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्ड पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर देना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड से प्राप्त ब्याज आय पर भी कर कटौती लागू होती है। नई व्यवस्था से इन निवेशकों को सीधा लाभ मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से भारी निकासी और रुपये की कमजोरी ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से लाखों करोड़ रुपये की निकासी की है, जबकि रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कर छूट का यह निर्णय भारतीय सरकारी ऋण बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ाने, निवेशकों का विश्वास मजबूत करने और रुपये पर बने दबाव को कम करने में सहायक साबित हो सकता है। इसके साथ ही सरकार को उम्मीद है कि भारतीय बॉन्ड बाजार में स्थिर और दीर्घकालिक विदेशी निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

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