ईरान-इजरायल तनाव से एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता
एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसका असर पूरे क्षेत्र के प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दिखाई दिया, जहां कई बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार सबसे अधिक प्रभावित रहा। देश का प्रमुख सूचकांक KOSPI शुरुआती कारोबार में करीब 9 प्रतिशत तक टूट गया, जिसके बाद बाजार में घबराहट को नियंत्रित करने के लिए सर्किट ब्रेकर तक लागू करना पड़ा। कारोबार दोबारा शुरू होने के बाद भी बाजार दबाव में रहा और दिन के अंत में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ।
टेक्नोलॉजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, हाल के महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में आई तेज तेजी के बाद अब निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर टेक्नोलॉजी कंपनियों पर पड़ा।
दक्षिण कोरिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए तकनीकी शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
जापान, चीन और ताइवान के बाजार भी फिसले
केवल दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि जापान, चीन, हांगकांग और ताइवान के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक कमजोर रहा, जबकि चीन और हांगकांग के प्रमुख सूचकांकों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा।
ताइवान का बाजार भी दबाव में रहा, क्योंकि वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में कमजोरी का असर वहां की प्रमुख कंपनियों पर पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल देखा गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मध्य पूर्व की स्थिति, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी। यदि तनाव कम नहीं हुआ तो एशियाई शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

