Hormuz संकट से तेल बाजार में बढ़ी अनिश्चितता, वैश्विक सप्लाई और कीमतों पर निवेशकों की नजर

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य तेल संकट

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। विशेष रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी स्थिति ने निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। सप्ताह के दौरान सितंबर डिलीवरी वाले WTI क्रूड ऑयल फ्यूचर्स लगभग 84.12 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि सप्ताह के अंत तक कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन बाजार में जोखिम का माहौल अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई थी। अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई में अस्थायी विराम और ओमान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव ने बाजार को राहत दी। निवेशकों को उम्मीद थी कि यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सहमति बन जाती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है और सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हो जाएंगी। इसी उम्मीद में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। ईरान ने ओमान के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान समर्थित समूहों पर जवाबी कार्रवाई की, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के भीतर रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए। इन घटनाओं ने बाजार में फिर से जोखिम बढ़ा दिया और तेल की कीमतों में अस्थिरता लौट आई।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ही वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा या सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

हालांकि इस दौरान कतर का एलएनजी टैंकर Al Areesh सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहा, जिससे यह संकेत मिला कि समुद्री यातायात पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है। इसके बावजूद निवेशक अब भी सतर्क हैं क्योंकि क्षेत्र में तनाव जारी है और किसी भी नए घटनाक्रम से तेल बाजार में फिर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा मुख्य रूप से मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

Full News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *