Oil Prices Slide 2% as Markets Brace for Bessent’s ‘Economic D-Day’
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026: एशियाई कारोबार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में पिछले सप्ताह की तेज तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की ईरान के खिलाफ नई आर्थिक पाबंदियों की घोषणा पर नजर बनी हुई है।
Oilprice.com के अनुसार, शुरुआती कारोबार में WTI क्रूड वायदा 2.16% गिरकर $85.18 प्रति बैरल और Brent क्रूड 2.19% गिरकर $92.32 प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, दोनों बेंचमार्क पिछले सप्ताह 5% से अधिक चढ़े थे। ईरानी कच्चे तेल के निर्यात में कमी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार की शुरुआती गिरावट को फिलहाल भू-राजनीतिक जोखिम में किसी बड़े सुधार के बजाय हालिया तेजी के बाद सामान्य मुनाफावसूली के रूप में देखा जा रहा है। हॉर्मुज में हाल के 48 घंटों में किसी नए हमले की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि इस मार्ग से टैंकर यातायात बेहद कम बना हुआ है।
बेसेंट की घोषणा पर बाजार की नजर
तेल बाजार के लिए सोमवार का सबसे बड़ा घटनाक्रम अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस है। बेसेंट ने ईरान के खिलाफ अभियान को “Economic D-Day” बताते हुए कहा है कि अमेरिका का लक्ष्य तेहरान की आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय स्रोतों को और अधिक सीमित करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, नई पाबंदियां ईरान से तेल खरीदने वाले देशों और उन संस्थाओं को निशाना बना सकती हैं जो ईरानी पेट्रोलियम के परिवहन, वित्तीय लेनदेन और समुद्री ईंधन हस्तांतरण में मदद करती हैं।
ईरान की चेतावनी से बढ़ा जोखिम
अमेरिकी कदमों के जवाब में ईरान ने कड़े संकेत दिए हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि आर्थिक दबाव बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा हुई है।
इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख के तेहरान दौरे की भी उम्मीद है, जिसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अब बाजार की दिशा मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका नई पाबंदियों के तहत कितनी सख्ती करता है और ईरान की प्रतिक्रिया कितनी आक्रामक रहती है। यदि ईरानी तेल निर्यात और हॉर्मुज के रास्ते आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

