कमोडिटी बाजार पर बढ़ता संकट: घटते भंडार से तेल और धातुओं की कीमतों में बड़ा उछाल संभव
वैश्विक कमोडिटी बाजार इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां सतह पर सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अंदरूनी हालात तेजी से चुनौतीपूर्ण बनते जा रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति में आई बाधाओं के बावजूद दुनिया की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिरता अस्थायी उपायों और सीमित भंडार के सहारे टिकी हुई है।
दुनियाभर की सरकारों और उद्योगों ने तेल, गैस और धातुओं की आपूर्ति में आई कमी का सामना करने के लिए अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल किया है।
अमेरिका और जापान जैसे देशों ने तेल के आपातकालीन भंडार बाजार में जारी किए, जबकि कई उद्योगों ने उत्पादन प्रक्रियाओं में बदलाव कर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया। इन कदमों ने फिलहाल बाजार को राहत दी है, लेकिन भंडार तेजी से घट रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल और एल्युमिनियम भंडार अब ऐसे स्तर पर पहुंच रहे हैं जो ऐतिहासिक रूप से बेहद कम माने जाते हैं। कई प्रमुख एक्सचेंजों पर उपलब्ध एल्युमिनियम स्टॉक दुनिया की जरूरतों को केवल कुछ दिनों तक ही पूरा कर सकता है।
इसी तरह तेल बाजार में भी भंडार लगातार कम हो रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि जब तक भंडार उपलब्ध रहते हैं, बाजार आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रख सकता है। लेकिन जैसे-जैसे ये भंडार समाप्त होने लगेंगे, कीमतों में तेज वृद्धि ही संतुलन बनाने का मुख्य साधन बन जाएगी। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।
ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण परिवहन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। वहीं उपभोक्ताओं को ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
इससे आर्थिक विकास की गति धीमी होने और मांग में कमी आने की आशंका बढ़ जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले महीनों में कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
ऐसे में तेल, धातु और ऊर्जा क्षेत्र की कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
