शेयर बाजार में तेजी: एगिस लॉजिस्टिक्स, क्यूपिड, अकुम्स ड्रग्स, जेबी केमिकल्स समेत NSE पर 47 स्टॉक्स ने छुआ 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर
राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) में बुधवार को हुई व्यापक तेजी के दौरान 47 स्टॉक्स ने अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर को छू लिया। फार्मास्युटिकल, लॉजिस्टिक्स और मिडकैप केमिकल सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखी गई।
एगिस लॉजिस्टिक्स का शेयर ₹485.70 के नए शिखर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसमें करीब 6% की तेजी आई।
कंपनी की मजबूत तिमाही कमाई और एलपीजी टर्मिनलों के विस्तार की योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। विशेष रसायन बनाने वाली क्यूपिड लिमिटेड भी ₹2,480 पर 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस महीने इसमें 18% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है।
अकुम्स ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स, जो पिछले साल ही सूचीबद्ध हुई थी, ₹1,245 पर अपने पिछले रिकॉर्ड को पार कर गई। कंपनी को निर्यात ऑर्डर और क्षमता उपयोग में वृद्धि से फायदा मिला है। जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स ने भी ₹1,920 को छूकर यह सूची में जगह बनाई।
अन्य प्रमुख शेयरों में एंड्रा पेपर्स ₹485, टीमलीज एजुकेशन 12% ऊपर और रेल विकास निगम 8% चढ़कर 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर रहे। बैंकिंग और वित्तीय सेवा स्टॉक्स का रुख मिला-जुला रहा, लेकिन चुनिंदा स्मॉलकैप ने शानदार प्रदर्शन किया।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत घरेलू तरलता और घटती मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण यह तेजी आई है।
नारनोलिया फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विक्रम धवन ने कहा, “52-सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूने वाले स्टॉक्स की चौड़ाई अंतर्निहित मजबूती को दर्शाती है। निवेशक अब कमाई की स्पष्ट संभावना वाले गुणवत्तापूर्ण मिडकैप स्टॉक्स में पैसा लगा रहे हैं।”
निफ्टी 50 इंडेक्स 0.7% चढ़कर 24,450 पर बंद हुआ, जबकि ब्रॉडर निफ्टी मिडकैप 100 में 1.2% का उछाल आया। कारोबार की मात्रा छह महीने के औसत से अधिक रही।
हालांकि, विशेषज्ञों ने आंख मूंदकर तेजी का पीछा करने से सावधान किया है। कुछ स्टॉक्स कम डिलीवरी वॉल्यूम पर अपर सर्किट में पहुंच गए थे। 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर वाली सूची में 28 स्मॉलकैप और 19 मिडकैप स्टॉक शामिल हैं। किसी भी लार्जकैप स्टॉक ने यह सूची नहीं बनाई।
यह तेजी संसद के मानसून सत्र से पहले आई है, जहां बाजार के अनुकूल नीतिगत घोषणाओं की उम्मीद है। वैश्विक संकेत भी सकारात्मक हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौली की संभावना से निवेशकों की भूख बनी हुई है।

