Dividend देने वाले शेयर कैसे खोजें? Dividend Yield के साथ ये 8 चीजें भी देखें

Dividend देने वाले शेयर कैसे खोजें

Dividend देने वाले शेयर कैसे खोजें और Dividend Yield क्या बताता है

यह देने वाले शेयर उन निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकते हैं जो शेयर की कीमत बढ़ने के साथ कंपनी से नियमित नकद आय की संभावना भी चाहते हैं। लेकिन केवल इस आधार पर किसी शेयर को चुनना कि कंपनी हर साल Dividend देती है, पर्याप्त नहीं है। कंपनी लाभांश क्यों दे रही है, कितनी मात्रा में दे रही है और क्या भविष्य में इसे बनाए रख सकती है, इन बातों को समझना जरूरी है।

Dividend Yield सबसे पहले देखने वाला महत्वपूर्ण आंकड़ा है। आसान भाषा में Dividend Yield बताता है कि मौजूदा शेयर कीमत के मुकाबले कंपनी सालाना कितना लाभांश दे रही है। NSE के अनुसार Dividend Yield कंपनी के वार्षिक लाभांश और शेयर की कीमत के बीच अनुपात को प्रतिशत में दिखाता है।

उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी का शेयर ₹500 पर कारोबार कर रहा है और वह एक साल में ₹25 प्रति शेयर लाभांश देती है, तो Dividend Yield 5 प्रतिशत होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशक को शेयर खरीदने के बाद निश्चित रूप से हर साल 5 प्रतिशत आय मिलेगी। लाभांश कंपनी के निर्णय और उसके भविष्य के मुनाफे पर निर्भर करता है।

यह भी समझना जरूरी है कि शेयर बाजार में किसी कंपनी के लिए हर साल लाभांश देना अनिवार्य नहीं है। NSE की निवेशक सामग्री स्पष्ट करती है कि कुछ सूचीबद्ध कंपनियां लाभांश दे सकती हैं जबकि कुछ नहीं देतीं और शेयर बाजार में प्रतिफल की कोई गारंटी नहीं होती।

इसलिए Dividend देने वाले शेयर खोजते समय केवल अधिक Dividend Yield वाले शेयरों की सूची बनाना सही तरीका नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि Dividend Yield के साथ कंपनी का लाभ, लाभांश भुगतान अनुपात, नकदी प्रवाह, कर्ज, लाभ वृद्धि, पिछले वर्षों का लाभांश इतिहास, पूंजी पर रिटर्न और कारोबार की गुणवत्ता भी जांची जाए।

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Dividend Yield कितना होना चाहिए और ज्यादा Yield हमेशा अच्छा क्यों नहीं होता

Dividend Yield को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे शेयर की मौजूदा कीमत के मुकाबले मिलने वाले वार्षिक लाभांश के रूप में देखा जाए। उदाहरण के लिए ₹1,000 के शेयर पर ₹50 सालाना लाभांश मिलने पर Dividend Yield 5 प्रतिशत होगा।

लेकिन Dividend Yield बढ़ने का एक कारण शेयर कीमत में गिरावट भी हो सकता है। मान लीजिए किसी कंपनी का वार्षिक लाभांश ₹20 ही है और शेयर की कीमत ₹500 से गिरकर ₹250 हो जाती है। तब Dividend Yield 4 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत दिखाई दे सकता है, जबकि कंपनी ने अपना लाभांश बढ़ाया ही नहीं है।

यही कारण है कि बहुत अधिक Dividend Yield देखकर तुरंत शेयर खरीदना जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऊंचा Yield कभी कभी यह संकेत दे सकता है कि शेयर कीमत में बड़ी गिरावट आई है और बाजार कंपनी के भविष्य के मुनाफे को लेकर चिंतित है।

दूसरी तरफ कम Dividend Yield वाली कंपनी भी खराब निवेश नहीं होती। अगर कंपनी अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा कारोबार के विस्तार, नई परियोजनाओं, कर्ज कम करने या भविष्य की वृद्धि में लगा रही है, तो वह कम लाभांश देकर भी लंबे समय में अच्छी वृद्धि दे सकती है।

इसलिए Dividend Yield की तुलना समान उद्योग की दूसरी कंपनियों से करना ज्यादा उपयोगी है। NSE भी Dividend Yield को एक अनुपात के रूप में परिभाषित करता है और NSE की इक्विटी शोध संबंधी सामग्री में Dividend Yield को अन्य वित्तीय अनुपातों के साथ विश्लेषण करने की बात शामिल है।

Dividend देने वाले शेयर चुनते समय लाभांश भुगतान अनुपात जरूर देखें

लाभांश भुगतान अनुपात यानी Dividend Payout Ratio यह समझने में मदद करता है कि कंपनी अपने मुनाफे का कितना हिस्सा शेयरधारकों को लाभांश के रूप में दे रही है। अगर कंपनी ने ₹100 का लाभ कमाया और ₹40 लाभांश के रूप में बांटा, तो भुगतान अनुपात 40 प्रतिशत होगा।

यह अनुपात कंपनी की लाभांश नीति को समझने में काफी उपयोगी है। बहुत कम भुगतान अनुपात का अर्थ हो सकता है कि कंपनी अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा कारोबार में वापस लगा रही है। यह भविष्य की वृद्धि के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन Dividend चाहने वाले निवेशक को वर्तमान आय कम मिल सकती है।

बहुत अधिक भुगतान अनुपात में भी सावधानी जरूरी है। अगर कंपनी लगातार अपने मुनाफे का लगभग पूरा हिस्सा लाभांश के रूप में बांट रही है, तो भविष्य में लाभ घटने की स्थिति में लाभांश बनाए रखना कठिन हो सकता है।

हालांकि किसी एक अनुपात को देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। कुछ परिपक्व कंपनियां लगातार अधिक भुगतान अनुपात रख सकती हैं क्योंकि उनके पास कारोबार विस्तार के लिए बहुत अधिक पूंजी की जरूरत नहीं होती।

कंपनी की वास्तविक स्थिति समझने के लिए कई वर्षों के भुगतान अनुपात को देखना बेहतर है। NSE पर उपलब्ध कंपनियों के निवेशक दस्तावेजों में Dividend Per Share और Dividend Payout Ratio दोनों को साथ दिखाया जाता है, जिससे समय के साथ लाभांश नीति में बदलाव को समझा जा सकता है।

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Dividend देने वाले शेयरों में ये 8 चीजें भी जरूर देखें

Dividend Yield के बाद पहली चीज कंपनी की लाभ वृद्धि है। अगर कंपनी का लाभ लंबे समय में लगातार बढ़ रहा है तो भविष्य में लाभांश बढ़ाने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है। इसके विपरीत लगातार घटता लाभ भविष्य के लाभांश पर दबाव डाल सकता है।

दूसरी चीज लाभांश का इतिहास है। केवल पिछले एक साल का बड़ा लाभांश देखने के बजाय कम से कम कई वर्षों का इतिहास देखना चाहिए। यह जांचना जरूरी है कि कंपनी नियमित रूप से लाभांश देती रही है या कभी बहुत बड़ा लाभांश देकर फिर कई वर्षों तक कम लाभांश देती रही।

तीसरी चीज कंपनी का नकदी प्रवाह है। कागज पर लाभ दिखना और वास्तव में कारोबार से नकदी बनना अलग बातें हैं। अगर कंपनी का परिचालन नकदी प्रवाह मजबूत है तो लाभांश भुगतान को बनाए रखने की क्षमता सामान्य रूप से बेहतर हो सकती है। NSE की इक्विटी शोध सामग्री में भी नकदी प्रवाह विवरण और उससे जुड़े अनुपातों को महत्वपूर्ण विश्लेषण उपकरणों में शामिल किया गया है।

चौथी चीज कंपनी का कर्ज है। बहुत अधिक कर्ज वाली कंपनी को अपने नकदी प्रवाह का बड़ा हिस्सा ब्याज और कर्ज चुकाने में लगाना पड़ सकता है। ऐसे में बहुत अधिक लाभांश लंबे समय तक बनाए रखना कठिन हो सकता है।

पांचवीं चीज पूंजी पर रिटर्न है। अच्छा लाभ कमाने वाली और अपनी पूंजी का प्रभावी इस्तेमाल करने वाली कंपनी की गुणवत्ता समझने के लिए Return on Equity और Return on Capital Employed जैसे आंकड़े उपयोगी हो सकते हैं।

छठी चीज कंपनी की बिक्री और लाभ की वृद्धि है। केवल लाभांश पर ध्यान देने के बजाय यह देखना जरूरी है कि कंपनी का मूल कारोबार बढ़ रहा है या नहीं। यदि बिक्री लंबे समय से स्थिर या कमजोर है तो ऊंचा लाभांश हमेशा सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

सातवीं चीज कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति है। मजबूत ब्रांड, कम लागत, मजबूत वितरण व्यवस्था या अन्य प्रतिस्पर्धात्मक लाभ कंपनी को लंबे समय तक बेहतर लाभ कमाने में मदद कर सकते हैं।

आठवीं चीज मूल्यांकन है। अच्छा Dividend देने वाली कंपनी का शेयर बहुत महंगा भी हो सकता है। इसलिए Dividend Yield के साथ P/E, P/B और कंपनी के ऐतिहासिक मूल्यांकन को भी देखना चाहिए। NSE की इक्विटी शोध सामग्री में Dividend Yield के साथ P/E, P/B और अन्य वित्तीय अनुपातों को भी विश्लेषण का हिस्सा बताया गया है।

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Dividend देने वाले शेयर खोजने का आसान तरीका क्या है

Dividend देने वाले शेयर खोजने के लिए सबसे पहले ऐसे शेयरों की सूची बनाई जा सकती है जिनका Dividend Yield उद्योग की तुलना में उचित या आकर्षक हो। लेकिन सूची बनाते समय केवल सबसे अधिक Yield वाले शेयरों को ऊपर रखना सही तरीका नहीं है।

इसके बाद पिछले कई वर्षों का लाभांश इतिहास देखना चाहिए। यदि कंपनी लगातार लाभांश दे रही है और समय के साथ उसे बढ़ाने में सक्षम रही है तो यह सकारात्मक संकेत हो सकता है। फिर भी भविष्य के लाभांश की कोई गारंटी नहीं होती।

तीसरे चरण में कंपनी की लाभ वृद्धि देखनी चाहिए। उदाहरण के लिए यदि कंपनी का लाभ पांच वर्षों में लगातार बढ़ा है और साथ में लाभांश भी बढ़ा है, तो यह स्थिरता का संकेत हो सकता है। लेकिन इसके पीछे कंपनी के कारोबार की वास्तविक स्थिति भी जांचनी चाहिए।

चौथे चरण में भुगतान अनुपात और नकदी प्रवाह की जांच करनी चाहिए। यदि कंपनी लगातार लाभांश देने के लिए अपने मुनाफे से ज्यादा राशि खर्च कर रही है या उसका नकदी प्रवाह कमजोर है, तो निवेशक को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

पांचवें चरण में कर्ज और मूल्यांकन की जांच करनी चाहिए। कम कर्ज, मजबूत नकदी प्रवाह, स्थिर लाभ वृद्धि और उचित मूल्यांकन वाली कंपनी को केवल ऊंचे Dividend Yield वाली कंपनी की तुलना में अधिक गंभीरता से जांचा जा सकता है।

अंत में कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय परिणाम और शेयर बाजार में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पढ़नी चाहिए। SEBI की निवेशक वेबसाइट निवेशकों को निवेश से पहले उचित जांच करने और वित्तीय जानकारी को समझने के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है।

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Dividend शेयरों में किन गलतियों से बचना चाहिए

सबसे बड़ी गलती केवल ऊंचे Dividend Yield देखकर शेयर खरीदना है। अगर शेयर कीमत किसी गंभीर कारण से गिरी है तो Dividend Yield अचानक बहुत ज्यादा दिखाई दे सकता है। इसलिए Yield बढ़ने का कारण समझना जरूरी है।

दूसरी गलती केवल पिछले साल के लाभांश को भविष्य का लाभांश मान लेना है। कंपनी का बोर्ड भविष्य में लाभांश कम कर सकता है, रोक सकता है या अलग राशि घोषित कर सकता है। इसलिए पिछले भुगतान को भविष्य की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

तीसरी गलती केवल लाभांश प्रतिशत पर ध्यान देना है। अगर शेयर पर 8 प्रतिशत Dividend Yield है लेकिन कंपनी का कारोबार लगातार कमजोर हो रहा है, तो निवेशक को शेयर कीमत में बड़ी गिरावट का जोखिम हो सकता है।

चौथी गलती एक ही कंपनी या उद्योग में बहुत ज्यादा पैसा लगाना है। Dividend के लिए निवेश करते समय भी विविधीकरण जरूरी है क्योंकि किसी एक उद्योग या कंपनी की समस्या पूरे निवेश को प्रभावित कर सकती है।

पांचवीं गलती कर और लागत को नजरअंदाज करना है। लाभांश से मिलने वाली राशि पर लागू कर नियम निवेशक की स्थिति और मौजूदा कानून के अनुसार अलग प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए केवल घोषित लाभांश देखकर वास्तविक हाथ में आने वाली राशि का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।

छठी गलती कंपनी के कर्ज और नकदी प्रवाह को नजरअंदाज करना है। लाभांश का वास्तविक आधार कंपनी की कमाई और नकदी पैदा करने की क्षमता है। इसलिए Dividend Yield को हमेशा व्यापक वित्तीय विश्लेषण के साथ देखना चाहिए।

सातवीं गलती शेयर कीमत में वृद्धि की संभावना को पूरी तरह भूल जाना है। किसी निवेश का कुल प्रतिफल केवल Dividend से नहीं बनता। लाभांश के साथ शेयर कीमत में बदलाव भी कुल प्रतिफल को प्रभावित करता है।

आठवीं गलती बाजार में गिरावट को देखकर बिना जांच के निर्णय लेना है। Dividend निवेश में भी शेयर कीमत घट सकती है। NSE स्पष्ट करता है कि शेयर बाजार में प्रतिफल की कोई गारंटी नहीं होती और निवेश में जोखिम मौजूद रहता है।

FAQs

1. Dividend देने वाले शेयर कैसे खोजें?

सबसे पहले Dividend Yield के आधार पर सूची बनाएं और फिर लाभ वृद्धि, Dividend Payout Ratio, नकदी प्रवाह, कर्ज, Dividend इतिहास, पूंजी पर रिटर्न, बिक्री वृद्धि और मूल्यांकन की जांच करें।

2. Dividend Yield कितना अच्छा माना जाता है?

Dividend Yield का कोई एक निश्चित अच्छा स्तर नहीं है। इसे समान उद्योग की कंपनियों और कंपनी के पुराने Yield से तुलना करके समझना ज्यादा उपयोगी है।

3. क्या ज्यादा Dividend Yield वाला शेयर अच्छा होता है?

जरूरी नहीं। बहुत अधिक Yield शेयर कीमत में बड़ी गिरावट के कारण भी दिखाई दे सकता है। इसलिए Yield बढ़ने का कारण जांचना जरूरी है।

4. Dividend Payout Ratio क्या बताता है?

यह बताता है कि कंपनी अपने लाभ का कितना हिस्सा शेयरधारकों को लाभांश के रूप में बांट रही है।

5. क्या Dividend देने वाली कंपनी हमेशा सुरक्षित होती है?

नहीं। Dividend देने वाली कंपनी के शेयर की कीमत गिर सकती है और भविष्य में कंपनी लाभांश कम या बंद भी कर सकती है।

6. Dividend Yield कैसे निकाला जाता है?

सामान्य रूप से वार्षिक प्रति शेयर लाभांश को मौजूदा शेयर कीमत से भाग देकर 100 से गुणा किया जाता है। NSE भी Dividend Yield को लाभांश और बाजार मूल्य के संबंध के रूप में परिभाषित करता है।

7. क्या Dividend Yield और Dividend Payout Ratio एक ही चीज हैं?

नहीं। Dividend Yield शेयर कीमत के मुकाबले लाभांश को दर्शाता है, जबकि Dividend Payout Ratio कंपनी के लाभ में से बांटे गए लाभांश का अनुपात बताता है।

8. क्या कम Dividend Yield वाला शेयर खराब है?

नहीं। कंपनी अपना लाभ कारोबार के विस्तार में लगा सकती है। ऐसे मामलों में कम वर्तमान लाभांश के बावजूद भविष्य की वृद्धि की संभावना हो सकती है।

9. Dividend शेयर खरीदते समय सबसे जरूरी चीज क्या देखें?

Dividend Yield के साथ कंपनी का लाभ, नकदी प्रवाह, कर्ज, लाभांश इतिहास, भुगतान अनुपात और कारोबार की भविष्य की संभावनाएं देखना जरूरी है।

10. क्या Dividend से नियमित आय की गारंटी मिलती है?

नहीं। कंपनी द्वारा लाभांश देना निश्चित नहीं है। NSE के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों के लिए लाभांश देना अनिवार्य नहीं है और शेयर बाजार में प्रतिफल की कोई गारंटी नहीं होती।

निष्कर्ष

Dividend देने वाले शेयर खोजने का सही तरीका केवल ऊंचे Dividend Yield वाली कंपनियों की सूची बनाना नहीं है। Dividend Yield सिर्फ शुरुआत का संकेतक है। उसके बाद कंपनी के लाभ, नकदी प्रवाह, कर्ज, Dividend Payout Ratio, पिछले लाभांश इतिहास, बिक्री वृद्धि, पूंजी पर रिटर्न और मूल्यांकन को एक साथ देखना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशक को Dividend को निश्चित आय नहीं समझना चाहिए। कंपनी का लाभ घटने, नकदी की स्थिति खराब होने या कारोबार में बदलाव आने पर लाभांश कम हो सकता है। इसलिए Dividend शेयर चुनते समय कंपनी की वास्तविक कमाई और भविष्य की क्षमता को प्राथमिकता देना अधिक समझदारी है। NSE और SEBI की निवेशक सामग्री भी निवेश निर्णय में व्यापक वित्तीय जानकारी और जोखिम को समझने के महत्व पर जोर देती है।

 

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग अत्यधिक जोखिम के अधीन है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

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