US फ़ेड की बैठक वाले हफ़्ते में कमोडिटी बाज़ार ऊँची महंगाई और युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल के साथ प्रवेश करेंगे।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक से पहले वैश्विक कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह बाजारों पर लगातार बनी महंगाई, ईरान युद्ध से जुड़े जोखिम और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर देखने को मिला। अब निवेशकों की नजर फेड के अगले नीतिगत फैसले और उसके संकेतों पर है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ईरान से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं और बाजार में यह आशंका मजबूत हुई है कि लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें वैश्विक महंगाई पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
तेल की बढ़ती कीमतें खास तौर पर उन अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती बन सकती हैं जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। ऊंची ईंधन लागत परिवहन, विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
महंगाई के बीच फेड का फैसला अहम
अमेरिका में महंगाई के अपेक्षाकृत मजबूत बने रहने के कारण फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों पर फैसला आसान नहीं है। बाजार अब यह आकलन कर रहा है कि केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच किस तरह संतुलन बनाएगा।
आगामी फेड बैठक के दौरान ब्याज दरों के फैसले के साथ अधिकारियों के आर्थिक अनुमान और आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
डॉलर और सोने पर भी नजर
पिछले सप्ताह अमेरिकी डॉलर सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और 99 के स्तर से ऊपर बंद हुआ। हालांकि, सप्ताह के दौरान डॉलर 98.59 तक फिसला था। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 10 से 20 वर्ष की अवधि वाली प्रतिभूतियों की पहली बायबैक प्रक्रिया भी बाजार के लिए चर्चा का विषय रही।
दूसरी ओर, सोने में भी सुधार देखने को मिला। भू-राजनीतिक तनाव आम तौर पर सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाता है, जबकि ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर का दबाव सोने के लिए चुनौती बना रहता है।
अगले सप्ताह बाजार में बढ़ सकती है अस्थिरता
कमोडिटी बाजार अब तेल की कीमतों, अमेरिकी महंगाई और फेड के फैसले पर एक साथ प्रतिक्रिया कर सकता है। यदि ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई को लेकर चिंताएं फिर बढ़ सकती हैं और ब्याज दरों की दिशा पर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है।
ऐसे माहौल में कच्चा तेल, सोना और डॉलर आने वाले सप्ताह में वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक बने रह सकते हैं।

