After JPMorgan Ban, India’s Auction-Based Closing Prices Head Into Monthly Expiry
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: भारत का नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम मंगलवार को अपने पहले मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी टेस्ट से गुजरा। 3 अगस्त से लागू Closing Auction Session (CAS) के तहत F&O शेयरों की क्लोजिंग कीमत अब ऑक्शन प्रक्रिया से तय होती है। मासिक एक्सपायरी के दौरान स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस की बड़ी संख्या इस व्यवस्था के लिए अब तक की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई।
CAS को बाजार में बेहतर मूल्य खोज और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि, अगस्त के पहले ही सप्ताह में इस व्यवस्था ने नियामकीय जांच का सामना किया। 13 अगस्त को Sensex की साप्ताहिक एक्सपायरी के दौरान ऑक्शन सेशन में कुछ शेयरों की कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव के बाद Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने दो संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की।
SEBI ने JPMorgan Chase से जुड़ी Copthall Mauritius Investment और Mansi Share and Stock Broking को बाजार से प्रतिबंधित किया तथा कथित गलत लाभ के रूप में कुल करीब ₹3.68 करोड़ की राशि जब्त करने का आदेश दिया। नियामक के अनुसार, दोनों संस्थाओं ने बड़े आक्रामक ऑर्डर और बाद में ऑर्डर रद्द करने जैसी गतिविधियों के जरिए Sensex की क्लोजिंग कीमत को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालांकि, जांच अभी जारी है और आरोप अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं।
मासिक एक्सपायरी में जोखिम इसलिए अधिक है क्योंकि single-stock derivatives की बड़ी संख्या अंतिम क्लोजिंग कीमत से प्रभावित होती है। विशेष रूप से physically settled stock options में क्लोजिंग कीमत में तेज बदलाव से निवेशकों की settlement और delivery obligations बदल सकती हैं।
इस बीच, मंगलवार के कारोबार में भारतीय शेयर बाजारों में एक्सपायरी के कारण अंतिम कारोबारी घंटे में सामान्य से अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। Reuters के अनुसार, Nifty 50 करीब 0.48% बढ़कर 24,334.55 और Sensex 0.37% बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि बाजार प्रतिभागियों की नजर नए CAS के तहत पहले मासिक एक्सपायरी के व्यवहार पर बनी रही।
विशेषज्ञों और बाजार प्रतिभागियों के लिए अब मुख्य सवाल यह है कि क्या ऑक्शन प्रणाली पर्याप्त liquidity के साथ स्थिर और विश्वसनीय closing prices उपलब्ध करा सकती है। यदि प्रक्रिया व्यवस्थित रहती है, तो इससे नए तंत्र पर भरोसा बढ़ सकता है। वहीं, असामान्य price swings या liquidity संबंधी समस्या सामने आने पर SEBI और एक्सचेंजों को नियमों में और बदलाव करने का दबाव बढ़ सकता है।
After JPMorgan Ban, India’s Auction-Based Closing Prices Head Into Monthly Expiry
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: भारत का नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम मंगलवार को अपने पहले मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी टेस्ट से गुजरा। 3 अगस्त से लागू Closing Auction Session (CAS) के तहत F&O शेयरों की क्लोजिंग कीमत अब ऑक्शन प्रक्रिया से तय होती है। मासिक एक्सपायरी के दौरान स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस की बड़ी संख्या इस व्यवस्था के लिए अब तक की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई।
CAS को बाजार में बेहतर मूल्य खोज और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि, अगस्त के पहले ही सप्ताह में इस व्यवस्था ने नियामकीय जांच का सामना किया। 13 अगस्त को Sensex की साप्ताहिक एक्सपायरी के दौरान ऑक्शन सेशन में कुछ शेयरों की कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव के बाद Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने दो संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की।
SEBI ने JPMorgan Chase से जुड़ी Copthall Mauritius Investment और Mansi Share and Stock Broking को बाजार से प्रतिबंधित किया तथा कथित गलत लाभ के रूप में कुल करीब ₹3.68 करोड़ की राशि जब्त करने का आदेश दिया। नियामक के अनुसार, दोनों संस्थाओं ने बड़े आक्रामक ऑर्डर और बाद में ऑर्डर रद्द करने जैसी गतिविधियों के जरिए Sensex की क्लोजिंग कीमत को प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालांकि, जांच अभी जारी है और आरोप अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं।
मासिक एक्सपायरी में जोखिम इसलिए अधिक है क्योंकि single-stock derivatives की बड़ी संख्या अंतिम क्लोजिंग कीमत से प्रभावित होती है। विशेष रूप से physically settled stock options में क्लोजिंग कीमत में तेज बदलाव से निवेशकों की settlement और delivery obligations बदल सकती हैं।
इस बीच, मंगलवार के कारोबार में भारतीय शेयर बाजारों में एक्सपायरी के कारण अंतिम कारोबारी घंटे में सामान्य से अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया। Reuters के अनुसार, Nifty 50 करीब 0.48% बढ़कर 24,334.55 और Sensex 0.37% बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि बाजार प्रतिभागियों की नजर नए CAS के तहत पहले मासिक एक्सपायरी के व्यवहार पर बनी रही।
विशेषज्ञों और बाजार प्रतिभागियों के लिए अब मुख्य सवाल यह है कि क्या ऑक्शन प्रणाली पर्याप्त liquidity के साथ स्थिर और विश्वसनीय closing prices उपलब्ध करा सकती है। यदि प्रक्रिया व्यवस्थित रहती है, तो इससे नए तंत्र पर भरोसा बढ़ सकता है। वहीं, असामान्य price swings या liquidity संबंधी समस्या सामने आने पर SEBI और एक्सचेंजों को नियमों में और बदलाव करने का दबाव बढ़ सकता है।

