अमेरिकी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, बॉन्ड यील्ड 20 साल के उच्च स्तर पर पहुंची; नैस्डैक दिन की ऊंचाई से 400 अंक फिसला
अमेरिकी शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी अस्थिरता देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक बढ़त के साथ हुई, लेकिन जैसे-जैसे लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचे, निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ गई और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती बढ़त गंवा दी। विशेष रूप से NASDAQ दिन के उच्चतम स्तर से लगभग 400 अंक नीचे आ गया, जबकि व्यापक बाजार पर भी दबाव देखने को मिला।
जुलाई महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अमेरिकी बाजार के लिए यह चुनौतीपूर्ण रहा। तकनीकी शेयरों पर दबाव के कारण NASDAQ 100 पूरे महीने में 7% से अधिक गिर चुका है। वहीं Dow Jones और S&P 500 लगभग सपाट प्रदर्शन के साथ महीने का समापन करने की ओर बढ़ रहे हैं। निवेशकों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक सेक्टर को लेकर दीर्घकालिक उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन ऊंची ब्याज दरों और महंगाई की चिंता फिलहाल बाजार पर हावी है।
कॉर्पोरेट नतीजों ने भी बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया दी। Amazon के बेहतर तिमाही नतीजों और क्लाउड कारोबार में मजबूत वृद्धि के बाद कंपनी के शेयरों में करीब 14% की तेजी दर्ज की गई। कंपनी ने अपने पूंजीगत निवेश (Capex) लक्ष्य को बढ़ाकर 220 अरब डॉलर कर दिया, जिससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर उसका भरोसा मजबूत दिखाई दिया।
इसके विपरीत, Apple के शेयरों में 9% से अधिक की गिरावट आई। कंपनी का आगामी तिमाही का राजस्व अनुमान बाजार की अपेक्षाओं से कमजोर रहा, जबकि मेमोरी चिप की संभावित कमी को लेकर प्रबंधन की सतर्क टिप्पणी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इस गिरावट के बाद NVIDIA एक बार फिर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई।
इस बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल जारी रही। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जबकि WTI क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कमजोर पड़ने से तेल की कीमतों को समर्थन मिला।
विश्लेषकों के अनुसार बाजार की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल है। 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद पहली बार 5.26% के स्तर पर पहुंच गई, जबकि 10-वर्षीय यील्ड भी एक साल के उच्च स्तर 4.73% तक पहुंची। इससे यह संकेत मिल रहा है कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है और निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होती जा रही है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

