बढ़ते कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार सपाट

भारतीय शेयर बाजार आज

मुंबई, 10 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शुरुआती कारोबार में लगभग सपाट रुख के साथ शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। बाजार की नजर वैश्विक संकेतों और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी है।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74,759 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 50 करीब 23,429 के स्तर पर बना रहा। बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव सीमित रहा।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के बीच Brent crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

इससे पहले बुधवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08% गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 203.60 अंक यानी 0.86% की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,431.50 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में लगातार कई सत्रों से कमजोरी बनी हुई है।

एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग कमजोर कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। 9 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में 582.99 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

इस बीच, तेल की कीमतों में तेजी से कुछ तेल उत्पादक कंपनियों को फायदा मिलता दिख रहा है। ONGC और Oil India के शेयरों में शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की गई।

आगे बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने की संभावना है। फिलहाल ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

मुंबई, 10 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शुरुआती कारोबार में लगभग सपाट रुख के साथ शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। बाजार की नजर वैश्विक संकेतों और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी है।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74,759 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 50 करीब 23,429 के स्तर पर बना रहा। बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव सीमित रहा।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के बीच Brent crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

इससे पहले बुधवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08% गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 203.60 अंक यानी 0.86% की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,431.50 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में लगातार कई सत्रों से कमजोरी बनी हुई है।

एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग कमजोर कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। 9 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में 582.99 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

इस बीच, तेल की कीमतों में तेजी से कुछ तेल उत्पादक कंपनियों को फायदा मिलता दिख रहा है। ONGC और Oil India के शेयरों में शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की गई।

आगे बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने की संभावना है। फिलहाल ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

मुंबई, 10 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शुरुआती कारोबार में लगभग सपाट रुख के साथ शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। बाजार की नजर वैश्विक संकेतों और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी है।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74,759 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 50 करीब 23,429 के स्तर पर बना रहा। बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव सीमित रहा।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के बीच Brent crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

इससे पहले बुधवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08% गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 203.60 अंक यानी 0.86% की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,431.50 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में लगातार कई सत्रों से कमजोरी बनी हुई है।

एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग कमजोर कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। 9 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में 582.99 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

इस बीच, तेल की कीमतों में तेजी से कुछ तेल उत्पादक कंपनियों को फायदा मिलता दिख रहा है। ONGC और Oil India के शेयरों में शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की गई।

आगे बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने की संभावना है। फिलहाल ऊंची तेल कीमतों के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

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