सतर्क बाजार के बीच यूरो की बढ़त सीमित, डॉलर अब भी मजबूत
वैश्विक तनाव के बीच मुद्रा बाजार में दबाव
सप्ताह की शुरुआत में यूरो ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती जरूर दिखाई, लेकिन बाजार में बनी सतर्कता के कारण इसकी बढ़त सीमित रही। यूरो अभी भी महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर के नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि निवेशक अभी बड़े जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में यूरो में हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक अनिश्चितता ने इसकी तेजी पर दबाव बनाए रखा। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार का माहौल पूरी तरह स्थिर नहीं है, इसलिए निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं।
ईरान से जुड़े संकेतों ने बदला माहौल
बाजार में कुछ राहत उस समय देखने को मिली जब ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से यह संकेत मिला कि अमेरिका और ईरान हाल ही में भेजे गए शांति प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। बताया गया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है।
इसके अलावा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही बहाल करने को लेकर ईरान और ओमान के तकनीकी दलों के बीच चर्चा की खबरों से तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई। इसका सीमित फायदा यूरो को भी मिला।
हालांकि, इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा था कि “समय तेजी से निकल रहा है।” इसके बाद बाजार में तनाव और बढ़ गया था।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यूरो अभी भी दबाव में है और अगर यह कमजोर स्तरों के नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आ सकती है। तकनीकी संकेत भी फिलहाल यूरो के पक्ष में मजबूत नजर नहीं आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेगी। जब तक बाजार में स्पष्ट स्थिरता नहीं आती, तब तक यूरो में बड़ी तेजी की संभावना सीमित रह सकती है।
आगे क्या संकेत
फिलहाल मुद्रा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच यूरो को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।
