4 हफ्ते में युद्ध का असर: कच्चा तेल 45% महंगा, शेयर बाजारों में भारी गिरावट
4 हफ्ते में युद्ध का असर: कच्चा तेल 45% महंगा, शेयर बाजारों में भारी गिरावट (US-इज़राइल-ईरान युद्ध का बाजार पर असर)
वैश्विक तनाव ने बाजारों को झकझोरा
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को 28 मार्च तक चार सप्ताह पूरे हो चुके हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। हमले के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े नेताओं की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से इज़राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
हालात जल्द ही क्षेत्रीय संघर्ष से वैश्विक संकट में बदल गए। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जो दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई का एक अहम मार्ग है। इसका असर उड़ानों, व्यापार और वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दिया।
भारतीय और वैश्विक बाजारों में गिरावट
पिछले चार हफ्तों में वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। भारत में निफ्टी50 और सेंसेक्स लगभग 9% गिर चुके हैं जबकि बैंकिंग सेक्टर में और ज्यादा दबाव दिखा।
इस गिरावट से भारतीय बाजार निवेशकों के करीब ₹40 लाख करोड़ डूब गए हैं। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी 7% से 8% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में करीब 45% की तेज बढ़ोतरी हुई है जिससे भारत जैसे आयात निर्भर देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ा है। दूसरी ओर, सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में भी गिरावट देखी गई जो आमतौर पर संकट के समय बढ़ते हैं।
गिरावट के प्रमुख कारण
बढ़ता भू राजनीतिक तनाव निवेशकों को जोखिम से दूर कर रहा है। इसके अलावा, बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है, जिससे फिक्स्ड इनकम निवेश ज्यादा आकर्षक हो गए हैं। भारत में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर लगभग 6.9% तक पहुंच गई है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ी है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से ₹1.11 लाख करोड़ निकाले हैं। इसके साथ ही रुपया भी कमजोर होकर 94 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है।
आगे क्या संकेत
युद्ध के बीच अब अमेरिका ने तनाव कम करने के संकेत दिए हैं और ईरान के सामने शांति के लिए प्रस्ताव रखा है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इन बातचीतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों की नजर अब अगले सप्ताह मिलने वाले संकेतों पर टिकी है।
