वेदांता का बड़ा कदम: 27 अरब डॉलर वैल्यू दोगुनी करने के लिए कंपनी 5 हिस्सों में होगी विभाजित
अप्रैल से लागू हो सकती है बड़ी कॉरपोरेट पुनर्रचना
देश की प्रमुख मेटल और माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड जल्द ही अपने कारोबार को पांच अलग अलग कंपनियों में विभाजित करने जा रही है। यह कदम लंबे समय से प्रस्तावित था और अब इसे अप्रैल 2026 से लागू किए जाने की तैयारी है। वेदांता डिमर्जर खबर |
कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के अनुसार, इस डिमर्जर का उद्देश्य कंपनी की मौजूदा लगभग 27 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू को दोगुना करना है।
इस पुनर्गठन के तहत वेदांता अपने विभिन्न बिजनेस सेगमेंट जैसे एल्युमिनियम, पावर, स्टील, बेस मेटल्स और ऊर्जा को अलग अलग सूचीबद्ध कंपनियों में बदलेगी। इससे हर यूनिट अपने क्षेत्र में अधिक फोकस के साथ काम कर सकेगी और निवेशकों को भी स्पष्ट विकल्प मिलेंगे।
निवेशकों के लिए खुलेंगे नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के डिमर्जर से कंपनियों की असली वैल्यू सामने आती है। अभी तक वेदांता एक समूह के रूप में काम कर रही थी, जिससे अलग अलग बिजनेस की सही कीमत का आकलन करना मुश्किल था।
अब पांच स्वतंत्र कंपनियां बनने से निवेशक अपनी पसंद के सेक्टर में सीधे निवेश कर सकेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई कंपनियों में वेदांता एल्युमिनियम, तलवंडी साबो पावर, वेदांता स्टील एंड आयरन, माल्को एनर्जी और पुनर्गठित वेदांता लिमिटेड शामिल होंगी।
कर्ज कम करने की रणनीति
इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण कंपनी के कर्ज को कम करना भी है। वेदांता लंबे समय से अपने कर्ज के बोझ को घटाने की कोशिश कर रही है। अलग अलग कंपनियां बनने के बाद हर यूनिट अपने स्तर पर वित्तीय प्रबंधन कर सकेगी जिससे कुल कर्ज का दबाव कम होने की उम्मीद है।
बाजार में बढ़ सकती है दिलचस्पी
डिमर्जर के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है क्योंकि अलग अलग सेक्टर में काम करने वाली कंपनियां अधिक पारदर्शिता और बेहतर प्रदर्शन दिखा सकती हैं। कंपनी का मानना है कि यह कदम लंबे समय में शेयरधारकों के लिए बेहतर रिटर्न लेकर आएगा।
फिलहाल बाजार की नजर इस बड़े बदलाव पर टिकी है, जो भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक माना जा रहा है।
